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Usi Ki Tarah Mujhe Saara Zamaan Chahe - Kumar Vishwas Poem

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  • Usi Ki Tarah Mujhe Saara Zamaan Chahe - Kumar Vishwas Poem

    उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे ,
    वो मेरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे !
    मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा उसका ,
    ये मुसाफ़िर तो कोई और ठिकाना चाहे !
    एक बनफूल था इस शहर में वो भी न रहा ,
    कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे !
    हम अपने जिस्म से कुछ इस तरह हुए रुखसत ,
    साँस को छोड़ दिया जिस तरफ़ जाना चाहे...!"

    Kumar Vishwas
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