Announcement

Collapse
No announcement yet.

All Kumar Vishwas Poetry

Collapse

Unconfigured Ad Widget

Collapse
This is a sticky topic.
X
X
  • Filter
  • Time
  • Show
Clear All
new posts

  • #31
    Re: All Kumar Vishwas Poetry

    ‎"तुम्ही पे मरता है ये दिल,अदावत क्यों नहीं करता ?
    कई जन्मों से बंदी है,बगावत क्यों नहीं करता ?
    कभी तुमसे थी जो,वो ही शिकायत है ज़माने से,
    मेरी तारीफ़ करता है, मोहब्बत क्यों नहीं करता .....?"

    Tumhein pe marta hai ye dil, adavat kyun nahin karta?
    Kayi janmo se bandi hai, bagawat kyun nahin karta?
    Kabhi tumse thi jo, wo hi shikayat hai jamane se
    Meri tareef karta hai, mohabbat kyun nahin karta?

    Comment


    • #32
      Re: All Kumar Vishwas Poetry

      बेक़रारी सी बेक़रारी है ,
      वस्ल हैं और फिराक तारी है
      जो गुज़ारी न जा सकी हम से
      हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
      बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
      क्या मेरी नीँद भी तुम्हारी है ?
      उस से कहियो की दिल की गालियों में
      रात-दिन तेरी इंतजारी है............................"

      Comment


      • #33
        Re: All Kumar Vishwas Poetry

        Unki khairo-khabar nahin milti
        Humko hi khaaskar nahin milti
        Shayari ko nazar nahin milti
        Mujhko tu hi agar nahin milti
        Rooh mein , Dil mein, Jism mein duniya,
        Dhoondta hoon magar nahin milti
        Log kehte hai rooh bikti hai,
        Main jidhar hoon idhar nahin milti


        उनकी खैरो-ख़बर नही मिलती,
        हमको ही ख़ासकर नही मिलती !
        शायरी को नज़र नही मिलती ,
        मुझको तू ही अगर नही मिलती!
        रूह में,दिल में,जिस्म में दुनिया,
        ढूंढता हूँ मगर नही मिलती !
        लोग कहते हैं रूह बिकती है ,
        मैं जिधर हूँ उधर नही मिलती ........!"



        -Kumar Vishwas

        Comment


        • #34
          Re: All Kumar Vishwas Poetry

          Gum mein hoon ya hoon shaad mujhe pata nahin
          Khud ko bhi hoon yaad mujhe khud pata nahin
          Main tujh ko chahta hoon magar maangta nahin
          Maula meri muraad mujhe khud pata nahin

          Comment


          • #35
            Re: All Kumar Vishwas Poetry

            ख़्वाब इतने तो दगाबाज़ न थे मेरे कभी ?
            ख्व़ाब इतनी तो मेरी नीँद नहीं छलते थे ?
            रात कि बात क्या इक दौर में ये ख़ानाबदोश
            दिन निकलते ही मेरे साथ-साथ चलते थे,
            मैं इन्हें जब भी पनाहों में जगह देता हुआ
            अपनी पलकों की मुडेरों पे सजा लेता था ,
            पूरा मौसम इन्ही ख्वाबों की सुगंधों से सजा
            मेरे चटके हुए नग्मों का मज़ा लेता था ,
            कुछ हवाओं के परिंदे इन्ही ख़्वाबों में लिपट
            चाँद के साथ मेरी छत पे आ के मिलते थे ,
            ये आँधियों को दिखा कर मुराद
            और ये आज की शब इनकी हिमाकत देखो
            इतनी मिन्नत पे भी ये एक पलक-भर ना रुके,
            इनकी औकात कहाँ ?ये है मुकद्दर का फ़रेब
            इतनी जिल्लत कि मेरे इश्क़ का दस्तार झुके,
            ये भी दिन देखने थे आज तुम्हारे बल पर
            ख़्वाब कि मुर्दा रियाया के भी यूँ पर निकले
            तुम्हारी बातें, निगह, वादे तो तुम जैसे थे
            तुम्हारे ख्वाब भी तुम जैसे ही शातिर निकले .....

            Comment


            • #36
              Re: All Kumar Vishwas Poetry

              Sach ke liye lado mat saathi
              Bhaari padta hai
              Jeevan bhar jo lada akela,
              Bahar-andar dukh jhela
              Pag-pag par kartavya-samar mein,
              Jo prano ki baazi khela,
              Aise sanki kotwal ko, chor dapt:ta hai
              Sach ke liye lado mat saathi, bhaari padta hai
              Kirno ko daagi batlaana,
              Ya darpan se aankh churaana
              Keechad mein dhans kar auron ko
              Ganga ji ki raah bataana
              Is sab se hi andhkaar ka, sooraj chadta hai
              Sach ke liye lado mat saathi, bhaari padta hai


              "सच के लिए लड़ो मत साथी
              भारी पड़ता है..................!
              जीवन भर जो लड़ा अकेला,
              बाहर-अन्दर का दुःख झेला,
              पग-पग पर कर्त्तव्य-समर में,
              जो प्राणों की बाज़ी खेला,
              ऐसे सनकी कोतवाल को,चोर डपटता है.....!
              सच के लिए लड़ो मत साथी,भारी पड़ता है...!
              किरणों को दागी बतलाना,
              या दर्पण से आँख चुराना,
              कीचड में धंस कर औरों को,
              गंगा जी की राह बताना,
              इस सब से ही अन्धकार का,सूरज चढ़ता है...!
              सच के लिए लड़ो मत साथी,भारी पड़ता है.....!"

              -Kumar Vishwas Latest Poem

              Comment


              • #37
                Re: All Kumar Vishwas Poetry

                Mann tumhara!
                Ho gya
                To ho gya...
                Eh tum the
                Jo sada se archna ke geet the
                Eh hum the
                Jo sada se dhaar ke vipreet the
                Gramya-savr
                Kaise kathin aalaap niymat saadh paata,
                Dwaar par sankalp ke
                Lakhkar prajya kampkampaata
                Ksheen sa svar
                Kho gaya to, kho gya
                Mann tumhara
                Ho gaya
                To ho gya
                Laakh naache
                Mor sa mann laakh tan ka seep tarse
                Kaun jaane
                Kis ghadi tapti dhraa par megh barse
                Ansune chaahe rahein
                Tan ke sajag shehri bulaave
                Praan mein utre magar
                Jab srishti ke aadim shlaave
                Beej baadal
                Bo gaya to, bo gaya
                Mann tumhara
                Ho gaya
                To ho gaya

                Kavita In Hindi Font

                मन तुम्हारा !
                हो गया
                तो हो गया .....
                एक तुम थे
                जो सदा से अर्चना के गीत थे,
                एक हम थे
                जो सदा से धार के विपरीत थे.
                ग्राम्य-स्वर
                कैसे कठिन आलाप नियमित साध पाता,
                द्वार पर संकल्प के
                लखकर पराजय कंपकंपाता.
                क्षीण सा स्वर
                खो गया तो,खो गया
                मन तुम्हारा!
                हो गया
                तो हो गया..........
                लाख नाचे
                मोर सा मन लाख तन का सीप तरसे,
                कौन जाने
                किस घड़ी तपती धरा पर मेघ बरसे,
                अनसुने चाहे रहे
                तन के सजग शहरी बुलावे,
                प्राण में उतरे मगर
                जब सृष्टि के आदिम छलावे.
                बीज बादल
                बो गया तो,बो गया,
                मन तुम्हारा!
                हो गया
                तो हो गया........

                -Kumar Vishwas


                Comment


                • #38
                  Re: All Kumar Vishwas Poetry

                  "ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं ,
                  जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं,
                  कशिश ज़िन्दा है अपनी चाहतों में जान ए जाँ क्यूँकी ,
                  हमें तुम कम समझती हो तुम्हें हम कम समझते हैं ....."

                  Gamon ko aabru apni khushi ko gam samjhte hain
                  Jinhe koi nahin samjha unhein bas ham samjhte hain
                  Kashish Jinda Hai Apni Chahton mein jaan-e-jaan kyunki
                  Hamein tum kam samjhti ho, Tumhein hum kam samjhte hain

                  Comment


                  • #39
                    Re: All Kumar Vishwas Poetry

                    " मरुस्थल-सा प्यासा हर पल-सा बीता-बीता
                    कब तक हम भोगेंगे जीवन रीता-रीता
                    धरती के उत्सव में,चंदा में,तारों में
                    गीतों में,ग़ज़लों में,रागों मल्हारों में
                    गूंजेंगी कब तक धुन बिछुरन के भाव की
                    कैसे ऋतु बीतेगी अपने अलगाव की..??

                    Comment


                    • #40
                      Re: All Kumar Vishwas Poetry

                      खुद के होने का मज़ा हम में उतर कर जी ले
                      ज़िन्दगी रोज़ कहाँ तुझ को मिलेंगे हम से ....!"

                      Khud ke Hone Ka Maza Ham Mein Utar Kar Je Le
                      Zindgi Roz Kahan Tujh Ko Milenge Ham Se

                      Comment


                      • #41
                        Re: All Kumar Vishwas Poetry

                        "हजारों रात का जागा हूँ सोना चाहता हूँ अब ,
                        तुझे मिलके मैं ये पलकें भिगोना चाहता हूँ अब ,
                        बहुत ढूंढा है तुझ को खुद में,इतना थक गया हूँ मैं ,
                        कि खुद को सौंप कर तुझ को,मैं खोना चाहता हूँ मैं ...."

                        Comment


                        • #42
                          Re: All Kumar Vishwas Poetry

                          Please add the link http://zouve.com/hindi-poetry/kavita...kumar-vishwas/ to the main thread.

                          It is a great kavita on Radha Krishna sung by Kumar Vishwas in Indore at minute 17 https://www.youtube.com/watch?v=h-ZR9uFes_o

                          I would recommend adding the lyrics:

                          hoon kaalgat se pare chirantan
                          abhi yaha the abhi yahi ho..
                          kabhi dharaa par kabhi gagan mein
                          kabhi kahan the kabhi kahin ho
                          tumhari radha ko bhaan hain
                          tum sakal charachar mein ho samaye
                          bas ek mera hain bhagya mohan ki
                          jisme hokar bhi tum nahin ho
                          ----------------------------------------------------------
                          hoon kaalgat se pare chirantan
                          abhi yaha the abhi yahi ho..
                          naa dwarika mein mile viraje
                          Biraj ki galiyon mein bhi nahin ho
                          Naa yogiyon ke ho dhyan mein tum
                          Aham jade gyan mein nahin ho
                          tumhe yeh jag dhoondta hain mohan
                          magar ise yeh khabar nahin hain
                          bas ek mera hain bhagya kanhaa
                          agar kahin ho tum yahin ho

                          Comment


                          • #43
                            Re: All Kumar Vishwas Poetry


                            तेरी ख़ुशरंग उदासी में जो सन्नाटा है
                            मैं उसको अपने कहकहों से आ गुलज़ार करूँ
                            तेरी ये शर्त कि बस एक बार मिलना हो
                            मेरी ये जि़द है कि बस एक बार प्यार करूँ

                            इश्क़ मैंने किया पाक़ीज़ा इबादत की तरह
                            और दुनिया ने मुझे समझा तिजारत की तरह
                            मेरे अन्दर हूँ, मैं दुनिया से यूँ महफ़ूज़ मगर
                            शोहरतें राह में लटकीं इबारत की तरह

                            ख़ुद से मिलकर जो ज़माने की समझ जागी है
                            अब ज़माने की ये मुश्किल है कि समझाए क्या
                            वरना जो कुछ है किताबों में अगर वो ही करे
                            आदमी मर ही न जाये तो क्या मर जाये क्या

                            अपनी साँसों से बिछड़ सकता हूँ जानां लेकिन
                            ग़ैर मुमकिन है कि अब तुझसे जुदा हो जाऊँ
                            तू फरिश्तों की तरह हाथ उठाये रहना
                            मैं तेरे इश्क़ में शायद कि ख़ुदा हो जाऊँ

                            Lyrics in English

                            Teri Khusrang Udaasi Mein Jo Sannata Hai
                            Main Usko Apne Kehkahon Se Aa Gulzar karun
                            Teri Ye Shart Ke Bas Ek Baar Hi Milna Ho
                            Meri Ye Zid Hai Ke Bas Ek Baar Pyaar Karun

                            Ishq Maine Kiya Paakeeza Ibadat Ki Tarah
                            Aur Duniya Ne Mujhe Samjha Tizajarat Ki Tarah
                            Mere Andar Hoon, Main Duniya Se Mehfooz Magar
                            Shohratein Raah Mein Latki Ibaarat Ki Tarah

                            Khud Se Milkar Jo Zamane Ki Samajh Jaagi Hai
                            Ab Zamane ki Ye Mushqil Hai Ke Samjhayen Kya
                            Barna Jo Kuch Hai Kitabon Mein Agar Wo hi Kare
                            Aadmi Mar Hi Na Jaye To Kya Mar Jaaye Kya

                            Apni Saanson Se Bichud Sakta Hoon Jaan Lekin
                            Gair Mumkin Hai Ke Ab Tujhse Judaa Ho Jaoon
                            Tu Farishte Ki Tarah Haath Uthaye Rehna
                            Main Tere Ishq Mein Shayad Khuda Ho Jaayun


                            English Translation



                            Dead silence that you have in our lively sadness
                            Let me fill it with my laughter
                            You have one condition to just meet once
                            But I am adamant that I will love just this once

                            I loved as a sacred prayer
                            And the world understood me as a businessman
                            Inside me, I am safe from the world
                            Fame stood in path as writings

                            Upon understanding myself, I understood about the world
                            Now the world’s problem is that they don’t know what to make me understand
                            If a persons is suppose to do what is written in books
                            Then should he not die or die instead

                            I can be separated from my breaths sweetheart
                            But it is impossible that I be separated from you
                            Keep your hands up like angels
                            As in your love I might become God myself

                            Comment

                            Working...
                            X